मेघनाथ के बाद एक और राक्षस ने राम और लक्ष्मण के प्राण संकट में ला दिए थे

कौन था वो राक्षस जो राम लक्ष्मण की बलि देने वाला था ?

आप इस समय रामायण दूरदर्शन पर देख रहे है | इस समय वानर राक्षस संग्राम अपने चरम पर है | रावण का प्रिय पुत्र इन्द्रजीत (मेघनाथ ) अपनी परम मायावी शक्तियों से राम लक्ष्मण सहित पुरे वानर दल को लोहा दे रहा है | उसमे अपने नाग पाश से दोनों भाइयो को बांध कर लगभग मृत्यु के द्वार तक पहुंचा दिया था | संकट मोचन श्री हनुमान जिनका जन्म ही राम जी के सहयोग के लिए हुआ था |

उन्ही संकट मोचन श्री हनुमान जी ने गरुड़ देव को बुलाकर नाग पाश से श्री राम और लक्ष्मण को मुक्त करवाया | मेघनाथ ने फिर अगले दिन शक्ति बाण से लक्ष्मण के प्राण संकट में डाल दिए पर फिर हिमालय सहित संजीविनी बूटी लाकर हनुमान जी ने फिर से लक्ष्मण को जीवन दे दिया |

इन सबके बीच एक प्रसंग और आता है जिसमे बताया गया है की रावण की तरफ से एक राक्षस और भी ऐसा है जो श्री राम और लक्षमण का अपरहण करके उन्हें अपने साथ पाताल लोक ले जाता है और अपनी आराध्य देवी को उन दोनों भाइयो की बलि चढ़ाना चाहता है | संभवत यह प्रसंग अभी तक रामानंद सागर की रामायण में नही दिखाया गया है | आइये जानते है कि वो वीर शक्तिशाली कौनसा असुर था |

अहिरावण ले गया था श्री राम और लक्ष्मण को पाताल लोक

रावण का मित्र अहिरावण पाताल लोक में निवास करता था | रावण के आह्वान पर वो युद्ध के मैदान से श्री राम और लक्ष्मण को अपनी मायावी शक्तियों से अपहरण कर अपने साथ पाताल लोक ले आया था | हनुमान जी ने उसका पीछा किया तब उनके पुत्र मकरध्वज से वे मिले | मकरध्वज ने बताया की अहिरावण तब ही मर सकता है जब एक साथ पांच दीपक बुझाये जाये |

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हनुमान जी ने धारण किया पंचमुखी रूप 

तब मूर्छित श्री राम और लक्ष्मण के करीब पहुँच कर श्री हनुमान जी ने अहिरावण के संहार के लिए पञ्चमुखी रूप धारण किया | उत्तर दिशा में वराह मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पश्चिम में गरूड़ मुख, आकाश की ओर हयग्रीव मुख एवं पूर्व दिशा में हनुमान मुख। इन 5 मुखों को धारण कर उन्होंने एकसाथ सारे दीपकों को बुझाकर अहिरावण का अंत किया और श्रीराम-लक्ष्मण को मुक्त किया।

मुक्त करवाया श्री राम और लखन को

अहिरावण की मृत्यु के बाद उन्होंने श्री राम और लक्ष्मण की मूर्छा दूर कर उन्हें अपने साथ युद्ध मैदान में ले आये |

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