विष्णु के अवतार भगवान नरसिंह की कहानी

भगवान नरसिंह जी की महिमा

Narsingh Avatar Story in Hindi नरसिंह भगवान अपने नाम के अनुसार आधे सिंह और आधे नर थे | शरीर मनुष्य का था पर चेहरा और हाथो के पंजे शेर के थे |  यह विष्णु के अवतार थे और उन्होंने यह रूप इसलिए धारण किया था की सिर्फ इसी रूप से वो हिरण्यकश्यप को मार सकते थे |


क्योकि हिरण्यकश्यप दैत्य ने स्वयं को अमर करने के लिए ब्रह्मा जी वरदान माँगा था की उसकी मृत्यु ना तो पशु से हो , ना ही व्यक्ति से , ना दिन में हो , ना रात में , ना अस्त्र से हो , ना शस्त्र से , ना जमीन पर हो ना आकाक्ष में | इसी कारण नरसिंह जी ने उसे अपनी गोद में बिठाकर अपने नाखूनों से छाती चीर दी | उस समय ना दिन था ना रात थी |

vishnu narsingh avatar ki kahani

हिरण्यकश्यप की मृत्यु के बाद भी नही हुए शांत नरसिंह जी


यह अवतार विष्णु का संभवत सबसे रूद्र अवतार था | खम्भा फाड़कर यह प्रकट हुए और भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए हिरण्यकश्यप  के सीने को अपने धारधार नाखुनो से चीर दिए पर फिर भी ये शांत नही हुए | यह देखकर नगरवासी और सभी देवी देवता पूरी तरह भयभीत हो गये | उन्हें लगा की आज महाप्रलय से यह जगत नष्ट हो जायेगा |

शिव ने किया शांत

तब भगवान शिव ने अपने एक अवतार में उन्हें शांत किया | बहुत जगह यह भी सुनने में आता है की भक्त प्रह्लाद ने अपनी भक्ति से नरसिंह जी के क्रोध को शांत किया था |

नरसिंह मुख्य मंत्र और हिंदी में अर्थ :

ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम् ॥

हे विष्णु के उग्र रूपी वीर नरसिंह भगवान , सभी दिशाओ में आपका ताप है , आप यम के भी यम हो , हम आपके समक्ष आत्म समर्पण करते है |

ॐ नृम नृम नृम नर सिंहाय नमः ।

नरसिंह भगवान के मुख्य दस विग्रह :

  1. उग्र नरसिंह भगवान
  2. क्रोध नरसिंह भगवान
  3. मलोल नरसिंह भगवान
  4. ज्वल नरसिंह भगवान
  5. वराह नरसिंह भगवान
  6. भार्गव नरसिंह भगवान
  7. करन्ज नरसिंह भगवान
  8. योग नरसिंह भगवान
  9. लक्ष्मी नरसिंह भगवान
  10. छत्रावतार नरसिंह भगवान

नरसिंह अवतार

नरसिंह जयंती :

भगवान नरसिंह जी अपने परम भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को धरती पर अवतरित हुए थे और इस दिन को नरसिंह जयंती के रूप में धूम धाम से मनाया जाता है | इस दिन व्रत करने से सभी दू:खो का निवारण होता है | नरसिंह भगवान ने प्रहलाद के पिता दैत्यराज राजा हिरण्यकश्यप का वध किया था |
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