माँ भुवनेश्वरी कौन है- इनकी महिमा और पूजा के बारे में जाने

भुवन शब्द का अर्थ ब्रह्मांड से है | और इस ब्रह्मांड की देवी का नाम है माँ भुवनेश्वरी | इन्हे प्रकृति की माँ भी कहा जाता है | दस महाविद्याओ में माँ भुवनेश्वरी पांचवे स्थान पर आती है |

Know about Maa Bhuwneshawari Devi

कैसे पड़ा माँ का नाम भुवनेश्वरी ?

माँ भुवनेश्वरी देवी

देवी भागवत के अनुसार दुर्गम दैत्य ने एक बार ब्रहमांड में देवताओ और मानवों का जीवन संकट में ला दिया था | तब देवताओ और संतो ने माँ की हिमालय पर आराधना की | तपस्या से प्रसन्न होकर माँ भगवती ने उन्हें दर्शन दिए और अपने अश्रुधार से सहस्त्रो धाराये प्रकट की | उन धाराओ के प्रवाह से भूमंडल के सभी जीव तृप्त हो गये | दुर्गम का अंत माँ ने किया और जीवन देने वाली माँ भुवन देवी भुवनेश्वरी कहलाई | इनका दूसरा नाम शताक्षी और शाकम्भरी भी है | भगवान शिव की यह सहचरी है और उनके साथ ही प्रकृति में प्राणों का संचार करती है |

भुवनेश्वरी जयंती :-

भाद्रपद मास की शुक्ल द्वादशी के दिन माँ भुवनेश्वरी का प्राकटय दिवस मनाया जाता है | इस साल 2020 में यह 30 august को आ रहा है |

भुवनेश्वरी देवी का स्वरुप

माँ भुवनेश्वरी 14 भुवनो की स्वामिनी है और इनका रूप कांति पूर्ण एवं सौम्य है | माँ त्रिनेत्र धारी है और मस्तिष्क पर चंद्रमा सुशोभित है | वरमुद्रा और मुस्कान के साथ यह अपने भक्तो को शक्ति का संचार करती है |

भुवनेश्वरी देवी माँ

जाने 14 भुवन और तीन लोको के बारे में में

माँ भुवनेश्वरी एकाक्षरी बीज मंत्र और अर्थ

माँ भुवनेश्वरी का बीज मंत्र है ह्रीं | इसे माया बीज मंत्र भी कहते है | इसमे ह शब्द शिव के लिए , र का अर्थ है प्रकृति , और नाद का अर्थ विश्वमाता और बिंदु का अर्थ है कल्याण करने वाला | पुरे मायाबीज का अर्थ है | शिव के साथ प्रकृति रूप वाली आद्या शक्ति हमारा कल्याण करे |

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