भगवान गणेश के सभी अवतार

माँ पार्वती के लाडले श्री गणेश भगवान ने देवी देवताओ और मनुष्यों की रक्षा के लिए कई बार अवतार लिए है | हिन्दू सनातन धर्म में महादेव विष्णु और गणेश जी ऐसे देवता है जो अवतार धारण करके दानवो का संहार करके रक्षा करते है | यहा ब्रह्मवैवर्त पुराण में पर एक बात अलग बताई गयी है की
भगवान गणेश कृष्ण के ही अवतार है |

गणेश के आठ अवतार

गणेश पुराण के अनुसार इन्होने अब तक 8 अवतार धारण किये है | आइये जानते है कौन कौन से अवतार हुए है श्री गणेश जी के |
1. वक्रतुंड (Vakratunda)- भगवान श्री गणेश का यह पहला अवतार था | वक्रतुंड अवतार  उन्होंने मत्सरासुर नामक दैत्य और उसके दो असुर पुत्रो को मारने के लिए लिया था |मत्सरासुर  ने भगवान शिव की घोर तपस्या की और महाशक्तियो की प्राप्ति की | उसने फिर जगत में अत्याचार करना शुरू कर दिया | उसका इसमे साथ उसके दो पुत्र भी दे रहे थे | देवी देवताओ ने शिव से अपनी व्यथा बताई थी शिव ने गणेश के अवतार लेने की बात बताई | देवी देवताओ के आहान पर गणेशजी ने वक्रतुंड धारण किया और मत्सरासुर  और उसके पुत्रो का वध करके विध्नो का नाश कर दिया |
2. एकदंत (Ekadanta)- गणेश जी का दूसरा अवतार एकदंत था | एक बार दानवो में मद नामक एक शक्तिशाली दानव हुआ जिसने गुरु शुक्राचार्य से शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त किया | इसने सभी देवी देवताओ को युद्ध में परास्त कर दिया | देवी देवताओ के कष्ट मिटाने के लिए और इस असुर मदासुर के संहार के लिए गणेश जी ने एकदन्त अवतार लिया |
3. महोदर (Mahodar)- मोहासुर असुर का वध करने के लिए  गणेश जी ने तीसरा अवतार महोदर का लिया | इस अवतार में उनका पेट बहुत बड़ा था | बिना युद्ध के ही मोहासुर ने गणेश के सामने खुद को समर्पण कर दिया |

4. गजानन (Gajanan)- एक बार कुबेर कैलाश पर्वत पर आते है और माँ पार्वती पर मोहित हो जाते है | उनके काम से लोभासुर का जन्म होता है | लोभासुर को दैत्य गुरु दीक्षा शिक्षा देते है और उन्ही के आदेश पर लोभासुर शिवजी की घोर तपस्या करते है और निर्भय होने का वरदान पाता है | संकट की फिर इस घडी में देवता गणेश का स्मरण करते है और भगवान गणेश गजानन अवतार लेते है |
5. लंबोदर (Lambodar)- समुद्रमंथन के समय मोहिनी रूप देखकर भगवान शिव मोहित हो जाते है और उनके काम से एक दैत्य क्रोधासुर उत्पन्न होता है | क्रोधासुर सूर्य की घोर तपस्या करके शक्ति प्राप्त करता है और त्रिलोक में उसके नाम का डंका बजने लगता है | देवता विध्न हरण गणेश की स्तुति करते है और लम्बोदर अवतार लेके श्री गणेश क्रोधासुर का संहार कर देते है |
6. विकट (Vikata)- जलंधर  के संहार के लिए जब भगवान विष्णु ने उसकी पत्नी वृंदा का सतीत्व भंग किया तब उसने एक मिलन से कामासुर नमक दैत्य की उत्पत्ति हुई जिसने त्रिलोक पर विजय प्राप्त करके अधर्म को बढ़ाने लगा |

देवताओ ने एक संकट के समय श्री गणेश की आराधन शुरू की तब श्री गणेश ने विकट रूप में अवतार लेके कामासुर से त्रिलोक को मुक्त करवाया | इस अवतार में गणेश का वाहन चूहा ना होकर एक मोर था |
7. विघ्नराज (Vighnaraj)- यह गणेश जी का सातवा अवतार है जो ममासुर दैत्य के वध के लिए गणेश ने लिया था |

8. धूम्रवर्ण (Dhoomvarna)- एक बार भगवान सूर्य देव को कर्म राज्य की प्राप्ति पर घमंड हो गया | सूर्य देव को उस समय एक छींक आ गयी और उस छींक से एक दैत्य का जन्म हुआ जिसका नाम अहम था | गुरु शुक्राचार्य की शिक्षा प्राप्त करके वो अहंतासुर हो गया। उसने श्री गणेश की घोर तपस्या की और महाशक्तिशाली बन गया है | पर उसके अत्याचार बढ़ने लगे तब श्री गणेश ने धूम्रवर्ण अवतार लिया और अहंतासुर को सबक सिखाया | धूम्रवर्ण अवतार में उसका रंग धुंए के समान था और शरीर से ज्वालाए फुट रही थी |

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