जगन्नाथ मंदिर के 10 मुख्य चमत्कार

जगन्नाथ मंदिर चमत्कार

जगन्नाथ मंदिर से जुड़े चमत्कार जिनके सामने विज्ञान भी है फैल :

भारत के चार मुख्य धाम में से एक है पूर्वी भारत के उड़ीसा में बना भगवान जगन्नाथ का मंदिर | इस मंदिर के साथ अनेको चमत्कार जुड़े हुए है | बताया जाता है द्वापर के बाद भगवान श्री कृष्ण जगन्नाथ बनकर पूरी में ही रहने लग गये है |  आइये जाने एक एक करके इन सभी रोमांचक चमत्कारों के बारे में  |

1) मंदिर के शिखर पर लहराता झंडा :

आपको जानकर अचरज होगा की इस मंदिर के शिखर पर झंडा हवा की दिशा के विपरीत लहराता है | यह सिर्फ इसी मंदिर में होता है | यह भगवान का चमत्कार ही है की झंडे का हवा के विपरीत लहराना |

2) उल्टा होकर  व्यक्ति चढ़ाता है ध्वजा :

मंदिर के शिखर पर लहराने वाली ध्वजा को व्यक्ति जब शाम के समय बदलता है तो उसे यह कार्य उल्टा होकर करना पड़ता है |

3) शिखर का सुदर्शन चक्र :

इस मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र लगा हुआ है जिसे आप पूरी के किसी भी कोने से देखने आपको वो सामने ही देखता नजर आएगा |


4) शिखर के ऊपर कोई नही उड़ता :

जगन्नाथपूरी मंदिर के शिखर के ऊपर से ना कोई पक्षी उड़ता है ना ही कोई विमान |

5) पूरी में हवाए बहती है उल्टी :

दिन के समय हवा सागर से जमीन की तरफ और रात में जमीन से सागर की तरफ आनी चाहिए पर पुरी में इसका भी विपरीत होता है |

6)  मंदिर के मुख्य गुम्बद की कभी छाया नही बनती :

यह भी आश्चर्य की बात है की कभी भी मुख्य गुम्बद की छाया नही देखी गयी है |

7) एक कदम की दुरी पर सागर की हर ध्वनी गायब :

मंदिर के अन्दर मुख्य द्वार से  जैसे ही एक भी कदम रखेंगे आपको बाहर से आने वाली समुन्द्र की आवाजे सुनना बंद हो जाएगी और पुनः जब फिर से आप मंदिर के बाहर एक भी कदम बढ़ायेंगे फिर से आपको सागर की आवाजे आनी शुरू हो जाएगी |
8) मंदिर के बाहर श्मशान और दुर्गन्ध भी बाहर :

मंदिर के बाहर स्वर्ग द्वार नाम से श्मशान है जहा चिताए जलती है पर आपको जानकर आश्चर्य होगा की यह दुर्गन्ध मंदिर के अन्दर बिलकुल नही आती |

9) संतुलित बनता है प्रसाद :

इस मंदिर में कभी २० हजार से लेकर २० लाख लोगो तक का प्रसाद बनता है पर ना ही कभी प्रसाद की मात्र ज्यादा पड़ती है और ना की कम | इस प्रसाद के एक भी दाना व्यर्थ नही जाता |
10) प्रसाद बनाने की विधि भी चमत्कारी :

मंदिर में प्रसादी बनाने के लिए 7 बर्तन एक के ऊपर एक रखे जाते है पर विस्मित करने वाली बात यह है की सबसे ऊपर वाले बर्तन का प्रसाद सबसे पहले और निचे वाले बर्तन का प्रसाद सबसे अंत में बनता है |

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