जगत का सबसे चमत्कारी शनि मंदिर – शिंगणापुर

शनि मंदिर शिंगणापुर

भगवान शनिदेव इस कलियुग में पूजे जाने वाले देवी देवताओ में विशेष स्थान रखते है और दुनियाभर में उनके बहुत सारे भक्त है | भगवान शनि को विशेषकर शनिवार के दिन पूजा जाता है | यह दंड अधिकारी के रूप में जाने जाते है | यह जब किसी की कुंडली में लगते है तो चाहे मनुष्य हो , पशु हो या देवी देवता हो , वे किसी को भी छोड़ते |
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भारत में शनि देव के मंदिर हर शहर में है और शनिवार को भक्तो का जमघट इन मंदिरों में देखा जा सकता है | भक्त इनकी पूजा इन्हे प्रसन्न करने के लिए करता है जिससे इनका अहित ना हो |

भारत में सबसे बड़ा शनि देव का  मंदिर

यदि भारत में सबसे चमत्कारी और बड़े शनि मंदिर की बात की जाये तो बस एक ही नाम आता है वो है महाराष्ट्र के अहमदनगर के पास स्थित शनि मंदिर, शिंगणापुर |

शनि देव शिला दर्शन , शिंगणापुर

यहाँ जिस शनि देव की काले रंग की चमकीली शीला की पूजा होती है वो स्वयंभू है अर्थात अपने आप अवतरित हुई है | वर्ष भर में लाखो भक्त इस शनि शीला के दर्शन करने दूर दूर से आते है |

शनि मंदिर, शिंगणापुर की शीला की महिमा :

यह शीला जमीन में धसी हुई है जिसके चारो तरफ संगमरमर का चबूतरा बना हुआ है | यह शीला 5 फीट 9 इंच की है और माना जाता है की इतनी ही लम्बी शीला अन्दर जमीन के अन्दर है |
हर दिन यह शीला खुले में ही है , चाहे वर्षा हो चाहे आंधी आये | ना ही इस शीला के ऊपर कोई छत्र है ना ही छत | माना जाता है शीला इसी हालत में रहे यह इच्छा स्वयं शनिदेव की है |
शीला पर भक्तो द्वारा सरसों का तेल एक पाइप के द्वारा चढ़ाया जाता है जो दूर से ही भक्त पाइप में तेल डाल देते है जो शनिदेव की शीला के ऊपर चढ़ जाता है |

शुरू में इस शिला को छूने मात्र से शिला से रक्त बहना शुरू हो जाता था |

शिला को लेकर शनिदेव ने यहा के रहने वालो को कई बार सपने में दर्शन दे कर आज्ञा दी है |

पढ़े कैसे  शिंगणापुर मंदिर में शनिदेव शिला रूप में अवतरित हुए :

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