रहस्यमयी तांत्रिक बावड़ी – पानी पीते ही लड़ने-झगड़ने लगते थे लोग

तांत्रिक बावड़ी का पानी पीकर लड़ने लगते है लोग

भारत में अनेकों ऐसी ऐतिहासिक जगह है जिनके साथ आश्चर्यचकित करने वाले रहस्य जुड़े हुए है | ऐसी ही एक जगह है ‘तांत्रिक बावड़ी’ जिसका यदि कोई पानी पी ले तो मानसिक स्थिति को खो कर आस पास वालो से लड़ने लग जाता है | आप सोच रहे होंगे की भला यह कैसे संभव है | जी हां यह बावड़ी एक तांत्रिक द्वारा श्रापित है , इसे इसी कारण  तांत्रिक बावड़ी के नाम से जाना जाता है |


तांत्रिक बावड़ी का रहस्य

लड़ाई करवाने वाली बावड़ी को किया गया बंद

जब लोग इस बावड़ी का पानी पीने से आपस में लड़ने-झगड़ने लगे तो यह खबर राजदरबार तक पहुँच गयी | राजा के विश्वसनीय लोगो ने जब ये घटनाये अपने आँखों से देखी तब यह निर्णय लिया गया की इस बावड़ी को बंद कर दिया जाये

कहाँ है यह तांत्रिक बावड़ी

यह बावड़ी श्योपुर जिले के गिरधरपुर कस्बे में स्थित हीरापुर गढ़ी में अवशेष के रूप में मौजूद है। – राजा गिरधर सिंह गौड़ ने 250 साल पहले अपने शासनकाल में गढ़ी में 8 बावड़ियां तैयार करवाई थीं। इसमें एक बावड़ी है, जिसे तांत्रिक बावड़ी कहा जाता है।बावड़ी करीब 100 वर्ग फीट की है और यह 10 फीट गहरी है। यह बावड़ी गढ़ी परिसर में सोरती बाग में शिवजी के स्थान के पास स्थित है। यहां पहले आम के पेड़ थे और इस बाग में राजा अक्सर आते थे।


tantrik bawadi

तांत्रिक ने किया था जादू टोना
स्थानीय किंवदंती के अनुसार एक नाराज तांत्रिक ने इसे श्राप देकर जादू-टोना कर दिया था की जो भी इसका पानी पियेगा वो सामने वाले से लड़ना झगड़ना शुरू कर देगा |

तांत्रिकों के लिए प्रसिद्ध था यह नगर
इस नगर को राजा गिरधर सिंह गौड़ ने बसाया था और उनके नाम पर इसे गिरधरपुर कहा जाने लगा । पुराना बसा हुआ गाँव हीरापुर के नाम से ही जाना गया | यह नगर जादूगरों और तांत्रिकों के लिए प्रसिद्ध रहा है। यहा वे आपस में अपने जादू टोने के लिए मुकाबले लड़ते थे | एक ऐसे ही मुकाबले में एक तांत्रिक ने पेड़ को अपने जादू से बिना छुए काट दिया तो दुसरे तांत्रिक ने उस कटे हुए भाग को पेड़ से पुनः जोड़ दिया |

 

आज दुर्दशा का शिकार है यह महल
यह गढ़ी आज दुर्दशा का शिकार है। मुख्य दरवाजे व उसके सामने मैदान में अतिक्रमण है। महल के आसपास झाड़ियां उग आई हैं। महल के बाहर एक शिवजी का मंदिर है, लेकिन अब उसमें देवी प्रतिमा बैठा दी गई है। गढी के अंदर एक छोटे मंदिर में शिवलिंग और भैरव प्रतिमा है। महल नष्ट होने के कगार पर है। दुःख इस बात का है कि अपनी पहचान को बचाने की बजाय लोग तो इसे बर्बाद करने में लगे हैं। राजाओं की सुंदर छत्रियां, पानी की बाबडियां बर्बादी की स्थिति में हैं।

साभार : bhaskar.com , ajabgjab.com

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