तिरुपति में केश (बालो) का दान


तिरुपति बालाजी मंदिर के साथ एक ऐसी प्रथा जुडी हुई है जो मन में जिज्ञासा उत्पन्न करती है की इस मंदिर में आने वाले  भक्त चाहे वो महिला हो या पुरुष अपने सिर के बालो को क्यों कटवाते है | शायद अपने केश दान करने की यह परंपरा विश्व में एकमात्र  इसी मंदिर के साथ ही जुडी हुई है | आखिर क्यों इस मंदिर में बाल चढ़ाये जाते है |

भक्तो के बाल कटवाने के पीछे मान्यता :

तिरुपति बालाजी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है | इस मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर के रूप में भगवान विष्णु विराजमान है | पास में ही इनकी पत्नी लक्ष्मीजी का मंदिर है जो पद्मावती समोवार मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर की पत्नी पद्मावती के रूप में विराजमान है | कहते है इन दोनों देवी देवताओ के मंदिर के दर्शन करने से ही यात्रा का पूर्ण फल प्राप्त होता है |

इस मंदिर के साथ यह प्रबल मान्यता जुडी  है जो भक्त इस मंदिर में दर्शन कर लेता है वो अपने सभी दुःख दर्द को यही छोड़ जाता है | भक्त अपने दुःख दर्द पाप लोभ लालच कष्ट आदि  को यही छोड़ने के लिए  अपने बालो का दान करते है |

एक अन्य मान्यता यह भी है की प्रभु हम हमारे केश आपको समर्प्रित कर रहे है , इन केशो के साथ हमारे मन में को घमंड या अहंकार हो तो वे भी आप खत्म कर दे | यह बाल हमारे उन अहंकारो के प्रतीक रूप में है |

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