जानें, क्या होता है पंचांग और क्या है इसका महत्व?

हिंदू धर्म में कुछ भी शुभ काम करने से पहले पंडित से  मुहूर्त जरूर दिखाया जाता है. कार्य मंगलमय और लाभप्रद हो इसके लिए सही तिथि , वार नक्षत्र देखे जाते है जिसमे पंचांग काम में लिया जाता है | पंचांग एक प्राचीन हिंदू कैलेंडर को कहा जा सकता है. पंचांग पांच अंग शब्द से बना है. हम इसे पंचांग […]

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श्री राम वनवास के दौरान किन किन स्थानो पर ठहरे थे

पुराने उपलब्ध प्रमाणों और राम अवतार जी के शोध और अनुशंधानों के अनुसार कुल १९५ स्थानों पर राम और सीता जी के पुख्ता प्रमाण मिले हैं जिन्हें ५ भागों में वर्णित कर रहा हूँ सिंगरौर :- यह वनवास का पहला पड़ाव था | यह गंगा घाटी के तल पर प्रयागराज से 35 किमी की दुरी पर है | इसी स्थान […]

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ऋषि अगस्त से जुड़ी मुख्य जानकारी

भारत के महान वैदिक ऋषियो में अगस्त मुनि का नाम भी उज्जवल अक्षरों में लिखा गया है | रामायण में जिक्र है कि इन्होने श्री राम के वनवास काल में उन्हें बहुत से दिव्य अस्त्र शस्त्र दिए थे जो रावण और असुरी सेना के संहार में काम आये थे | वे गुरु वशिष्ट के बड़े भाई थे | इनका नाम […]

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ऋषि मार्कण्डेय मुनि की महिमा और जीवनी

मार्कण्डेय ऋषि ने मार्कण्डेय पुराण की रचना की जिसमे उन्होंने इसके प्रसंग क्रौष्ठि को सुनाये थे | इस पुराण में देवी कात्यायनी की विस्तार से महिमा बताई गयी है | इनके पिता मृकंड थे और ये स्वयं देवादिव महादेव के परम भक्त थे | शिव कृपा से इनका जन्म हुआ और इनकी आयु सिर्फ 16 साल की थी | मृत्यु […]

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राजा परीक्षित कौन है

महाभारत के अनुसार राजा परीक्षित अर्जुन के पौत्र और अभिमन्यु और उत्तरा के पुत्र थे | अश्वत्थामा ने कौरव पांडव युद्ध के समय ब्रम्हशिर अस्त्र से उत्तरा के गर्भ को गिराने का प्रयास किया पर श्री कृष्ण ने इस प्रयास को विफल कर दिया  | श्री कृष्ण ने इस नंदनीय पाप के लिए अश्वत्थामा को जीवन भर सड़ते रहने का […]

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गांधारी के श्राप के कारण श्री कृष्ण के साथ यदुवंश का अंत

इतिहास का सबसे बड़ा युद्ध कुरुक्षेत्र का माना जाता है जिसमे भाई से भाई भिड़े , गुरु से शिष्य , दादा से पोते , मामा से भांजे और रिश्तो से रिश्ते | यह युद्ध श्री कृष्ण भगवान चाहते थे और वे चाहते तो इसे रोक सकते थे पर उन्होंने ऐसा नही किया | गांधारी अपने पुत्रो के मरने से अत्यंत […]

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अक्षय पात्र क्या होता है और शास्त्रों में इसका विवरण

अक्षय अर्थात जिसका कभी अंत ना हो , क्षय ना हो | और पात्र का अर्थ आम भाषा में बर्तन से है | महाभारत के वनपर्व में इस अक्षय पात्र के बारे में बताया गया है | यह ऐसा पात्र होता है जिसमे जब भी हाथ डालो आपको खाने और पीने के लिए मनवांछित भोजन और जल की प्राप्ति हो […]

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महर्षि अगस्त ने क्यों पी लिया समुन्द्र का पूरा जल

अगस्त मुनि द्वारा सागर का सम्पूर्ण जल पीने की कथा महाभारत के सभापर्व में एक प्रसंग आया है जिसमे बताया गया है कि एक बार लोक कल्याणार्थ महर्षि अगस्त ने समुन्द्र का पूरा जल पीकर देवताओ को दैत्यों पर विजय दिलवाई थी | एक बार इंद्र सहित सभी देवता अगस्त मुनि के आश्रम पहुंचे और उनसे कालेह और उसके साथियों […]

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अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं हनुमान जी श्लोक और अर्थ

यदि हनुमान जी की महिमा के बारे में जानना चाहिए तो यह 4 लाइन का श्लोक गागर में सागर की तरह बहुत ही अच्छे ढंग से इनकी महानता और वीरता को इंगित करता है | अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्‌। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥ padhe – हनुमान जी के पुत्र मकरध्वज के जन्म की कथा श्लोक का हिंदी अर्थ – […]

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कैसे हुआ दैत्य और राक्षसों का जन्म – जाने उत्पति की कथा

संसार में सकारात्मकता और नकारात्मकता हमेशा उसी तरह विद्यमान रही है जैसे प्रकाश के साथ अँधेरा | सुख के साथ दुःख | परोपकार के साथ कपट | ऐसे ही देवताओ के साथ राक्षस भी उत्पन्न हुए है | यह सब प्रभु की माया का परिणाम है जो हमें इन दोनों के पृथक गुणों अवगुणों के बारे में बताता है | […]

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